Front hulchul news : देशभर में चल रही सी.बी.एस.ई. बोर्ड परीक्षाओं के बीच एक बड़ा विवाद खड़ा हो गया है, 10वीं और 12वीं की परीक्षाओं में प्रश्नपत्रों के ‘डिफिकल्टी लैवल’ (कठिनाई का स्तर) में भारी अंतर होने के गंभीर आरोप लग रहे हैं। इस मामले में एक अध्यापक प्रशांत किराड ने सी.बी.एस.ई. के खिलाफ जनहित याचिका (पी.आई.एल.) दायर कर दी है। उनका आरोप है कि अलग-अलग रीजन के क्वैश्चन पेपर का लेवल एक जैसा नहीं रखा गया जिससे विद्यार्थियों के साथ सरेआम भेदभाव हो रहा है और उनके अंक अब मेहनत के बजाय किस्मत पर टिक गए हैं। देश-विदेश के केंद्रों पर करीब 43 लाख से अधिक विद्यार्थी 17 फरवरी से शुरू हुई बोर्ड परीक्षाओं में बैठ रहे हैं।
बता दें कि विवाद की शुरुआत 10वीं के मैथ्स के पेपर से हुई, जो अब 12वीं के फिजिक्स पेपर तक पहुंच गई है। याचिकाकर्त्ता का दावा है कि बोर्ड परीक्षा में विद्यार्थियों से ‘आई.आई.टी.-जे.ई.ई.’ मेन और एडवांस्ड लेवल के कठिन सवाल पूछे जा रहे हैं। कुछ सैट्स बहुत आसान हैं, जबकि कुछ इतने मुश्किल हैं कि उन्हें हल करने के लिए प्रतियोगी परीक्षाओं जैसी गहरी जानकारी चाहिए। उन्होंने बोर्ड से सवाल किया है कि बिना कठिनाई का स्तर जांचे इतने सारे सेट बनाने की क्या जरूरत थी?
एक ही विषय, पर पन्नों की संख्या में बड़ा अंतर
परीक्षा तंत्र की कार्यप्रणाली पर तब और सवाल उठे जब 10वीं मैथ्स बेसिक के 2 अलग-अलग सैट्स में पन्नों की संख्या में भारी अंतर देखा गया। एक तरफ सैट-1 में जहां केवल 15 पेज थे, वहीं सेट-2 में 27 पेज का क्वैश्चन पेपर थमाया गया। हालांकि दोनों में सवालों की संख्या 38 ही थी लेकिन 12 पन्नों के इस बड़े अंतर ने विद्यार्थियों और अभिभावकों को मानसिक दबाव में डाल दिया है। आरोप है कि कुछ पेपर सीधे तौर पर ‘एन.सी.ई.आर.टी.’ सिलेबस से बाहर के थे जिससे पूरे परीक्षा तंत्र की निष्पक्षता पर सवालिया निशान लग गया है।
