पंजाब के करीब 2500 आयुष्मान आरोग्य केंद्रों में सेवाएं दे रहे सीएचओ (कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर) ने बुधवार से अपनी अनिश्चितकालीन हड़ताल फिर शुरू कर दी। हड़ताल के पहले ही दिन गुरदासपुर सहित पूरे पंजाब में आयुष्मान आरोग्य केंद्रों पर ताले लग गए, जिससे हजारों गांवों में प्राथमिक स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हुईं। इस दौरान सीएचओ ने अपने-अपने जिलों के सिविल सर्जन कार्यालयों के बाहर प्रदर्शन करते हुए पंजाब सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की तथा सरकार द्वारा जारी नई गाइडलाइंस की प्रतियां जलाकर अपना विरोध दर्ज कराया।सीएचओ यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष डॉ. सुनील तरगोतरा ने आरोप लगाया कि पंजाब सरकार ने कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसरों के साथ वादाखिलाफी की है। उन्होंने कहा कि कई दौर की बैठकों में सरकार ने ₹5000 वेतन वृद्धि का आश्वासन दिया था, लेकिन 22 जुलाई को जारी पत्र के माध्यम से इस राशि को वेतन में शामिल करने के बजाय इंसेंटिव के रूप में लागू कर दिया गया और इसके साथ बेंचमार्क की शर्त जोड़ दी गई। इसके बाद 4 अगस्त को जारी नई गाइडलाइंस में भी ऐसी कई शर्तें लगा दी गईं, जिन्हें पूरा करना लगभग असंभव है।
यूनियन नेताओं ने कहा कि नई गाइडलाइंस का उद्देश्य सीएचओ को वास्तविक आर्थिक लाभ से वंचित रखना है। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग करते हुए कहा कि यदि किसी अधिकारी या एचडब्ल्यूसी लीड कंसल्टेंट की भूमिका सामने आती है तो उसके खिलाफ भी उचित कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि ₹5000 की स्थायी वेतन वृद्धि, लॉयल्टी बोनस, सीएचओ का नियमित कैडर मंजूर करना तथा वेतन और इंसेंटिव को मर्ज करने सहित कई प्रमुख मांगें अब भी लंबित हैं। यूनियन ने कई बार सरकार और स्वास्थ्य विभाग से बैठक के लिए समय मांगा, लेकिन कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला।
यूनियन ने घोषणा की कि 10 अगस्त को एनएचएम पंजाब के मुख्यालय, चंडीगढ़ में पंजाब भर से हजारों सीएचओ विशाल धरना देंगे। नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा। यूनियन नेताओं ने कहा कि आयुष्मान आरोग्य केंद्रों के बंद होने की स्थिति के लिए सीएचओ नहीं, बल्कि पंजाब सरकार की वादाखिलाफी और कर्मचारी विरोधी नीतियां जिम्मेदार हैं। उन्होंने कहा कि इसके कारण आम लोगों को होने वाली असुविधा की पूरी जिम्मेदारी पंजाब सरकार और स्वास्थ्य विभाग की होगी।
