फिल्लौर के ब्रह्मपुरी गांव में तानाशाही का नंगा नाच: मनरेगा में सरेआम 36 फर्जी हाजिरियों का घोटाला, अब स्कूली बच्चों की बसें रोककर पंचायत दिखा रही है गुंडागर्दी!

Front hulchul news : हल्का फिल्लौर के गांव ब्रह्मपुरी से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आ रही है, जिसे देखकर आप भी दंग रह जाएंगे। एक तरफ सरकारी खजाने को लूटने का गंदा खेल चल रहा है, तो दूसरी तरफ गांव के मासूम बच्चों के भविष्य के साथ सरेआम खिलवाड़ किया जा रहा है। हल्का फिल्लौर में इस वक्त ‘चारसौबीसी’ और गुंडागर्दी का ऐसा नंगा नाच चल रहा है, जिसने प्रशासन की नींद उड़ा दी है!”

“सबसे पहले जरा इन लाइव तस्वीरों और दस्तावेजों को गौर से देखिए! ये कोई आम कागजात नहीं हैं, बल्कि सरकारी पैसों की लूट का पूरा कच्चा-चिट्ठा हैं। हल्का फिल्लौर के गांव ब्रह्मपुरी में मनरेगा (MGNREGA) योजना के तहत चौथे और पांचवें महीने में सरेआम ठगी का खेल चल रहा है। दस्तावेजों के सबूत गवाही दे रहे हैं कि किस तरह कागजों पर किसी की 14 तो किसी की 15 फर्जी हाजिरियां लगाकर सरकारी धन को सरेआम डकारा जा रहा है।” “जब हमारी टीम ने धरातल पर जाकर गांव की सच्चाई टटोली, तो एक तिनका भी सफाई का नजर नहीं आया। गांव की गलियों में गंदगी के ढेर लगे हैं। जब ग्रामीणों ने इस बारे में सरपंच से बात की और पूछा कि मनरेगा के तहत रखे गए वर्करों से सफाई क्यों नहीं करवाई जा रही, तो सरपंच साहब ने जो जवाब दिया उसने होश उड़ा दिए! सरपंच ने साफ पल्ला झाड़ते हुए कह दिया— ‘हमने कोई ठेका नहीं ले रखा, मनरेगा के वर्कर हमारे पास हैं ही नहीं!'”


(36 फर्जी वर्करों का पर्दाफाश और जनता का आक्रोश)
“लेकिन जब इस मामले का आधिकारिक रिकॉर्ड खंगाला गया, तो भ्रष्टाचार की परतें खुलकर सामने आ गईं। रिकॉर्ड के मुताबिक, गांव के ही 36 स्थानीय लोगों के नाम मनरेगा वर्कर के रूप में चढ़ाए गए हैं। अब बड़ा सवाल यह है कि जब जमीन पर एक मजदूर काम करने नहीं आया, कोई सफाई नहीं हुई, तो फिर इन 36 लोगों के नाम पर फर्जी हाजिरियां डालकर सरकारी पैसा किसकी जेब में जा रहा है? इन सब हरकतों के बाद अब गांव का कोई भी व्यक्ति इस भ्रष्ट पंचायत को अपनी पंचायत मानने को तैयार नहीं है!”


(दूसरा बड़ा खुलासा – स्कूली बच्चों की बसें रोकना और तानाशाही)
“लेकिन जुल्म और तानाशाही की हद तो तब हो गई, जब इस पंचायत ने स्कूली बच्चों को भी नहीं बख्शा! पंचायत की ओर से गांव में स्कूल की बस आने पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। जरा सोचिए, किस हक और अधिकार के तहत यह पंचायत मासूम बच्चों को घरों से स्कूल तक जाने से रोक रही है? क्या पंचायती राज विभाग या किसी बड़े अधिकारी ने इन्हें यह अधिकार दे दिया है कि ये बच्चों की शिक्षा के रास्ते में रुकावट बनें?”

(प्रशासन पर सीधा सवाल और सरपंच पति की गुंडागर्दी)
“यह घटना अब हल्का फिल्लौर के पंचायती अधिकारियों के ऊपर बहुत बड़ा सवालिया निशान खड़ा कर रही है! जनता पूछ रही है कि क्या अधिकारियों की मिलीभगत से यह सब चल रहा है? कागजों पर गांव की सरपंच हीना कुमारी हैं, लेकिन धरातल पर सारी गुंडागर्दी और हुकूमत उनके पति द्वारा चलाई जा रही है। पति की इस अवैध दखलअंदाजी से पूरा गांव त्रस्त और परेशान हो चुका है।”

(टूटी हौती और पंचायत की नाकामी)
“असलियत यह है कि गांव में पानी की टूटी हुई टंकी या ‘हौती’ के कारण रास्ता खराब हुआ है और लोगों को परेशानी आ रही है। पंचायत का फर्ज बनता था कि उस टूटी हुई हौती को तुरंत ठीक करवाया जाता, बढ़िया और नया सामान लगाकर उसे दुरुस्त किया जाता ताकि किसी को भी आने-जाने में कोई दिक्कत न हो। लेकिन अपनी नाकामी छुपाने के लिए यह पंचायत अब स्कूली बच्चों को निशाना बना रही है और उनकी बसें रुकवा रही है।”
“गांव के लोग अब इन हरकतों से तंग आ चुके हैं। अब देखना यह होगा कि सोई हुई सरकार और प्रशासन इस मामले पर कब कड़ा एक्शन लेता है और इन दबंगों पर कानून का डंडा कब चलता है?