Front hulchul news : दिल्ली गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के पूर्व अध्यक्ष मनजीत सिंह जी.के. ने हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान उत्तराखंड में हुए विवाद को लेकर एक वीडियो जारी कर कई अहम सवाल उठाए हैं। उन्होंने मामले की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि दोषी चाहे कोई भी हो, कार्रवाई तथ्यों के आधार पर होनी चाहिए, न कि एकतरफा।जीके ने कहा कि पिछले दिनों से सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रही है, जिसमें हेमकुंड साहिब जा रहे बाणाधारी (निहंग) बच्चों और स्थानीय लोगों के बीच पार्किंग को लेकर विवाद होता दिखाई दे रहा है। उनका दावा है कि विवाद की शुरुआत स्थानीय लोगों की ओर से हुई और बाद में स्थिति बिगड़ गई। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों ने कृपाण निकाली तो वह अपनी आत्मरक्षा (सेल्फ डिफेंस) के लिए थी। उन्होंने आरोप लगाया कि पुलिस ने बाणाधारी बच्चों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया, जबकि यह भी जांच होनी चाहिए कि स्थानीय लोगों की क्या भूमिका थी। जीके ने उत्तराखंड सरकार से अपील की कि निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जाए।
वीडियो में कृपाण दिखाते हुए उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी अपने वाहन में शस्त्र रखते हैं और यह सिख धर्म की परंपरा तथा गुरु साहिब की बख्शिश है। उन्होंने कहा कि कृपाण सिखों की धार्मिक पहचान का हिस्सा है और इसे किसी भी स्थिति में प्रतिबंधित नहीं किया जा सकता। जीके ने अपने संबोधन में इतिहास का उल्लेख करते हुए कहा कि सिखों की शस्त्र परंपरा सदियों पुरानी है। उन्होंने कहा कि यह केवल हथियार नहीं, बल्कि धर्म और न्याय की रक्षा का प्रतीक है। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि कोई संस्था या एजेंसी कृपाण या अन्य धार्मिक शस्त्रों पर प्रतिबंध लगाने की दिशा में काम कर रही है, वो बर्दाशत नहीं। उन्होंने कहा कि सिख समुदाय अपने धार्मिक शस्त्रों पर किसी भी प्रकार की पाबंदी स्वीकार नहीं करेगा। जीके ने अंत में कहा कि हेमकुंड साहिब मार्ग पर हुए विवाद की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और जो भी दोषी पाया जाए, उसके खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जाए।
