Front hulchul news : नेपाल में पिछले महीने आई बोटेकोशी नदी की बाढ़ से तबाह हुई संपत्तियों और बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए नेपाल ने भारत से बड़ी सहायता की मांग की है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वाग्ले ने गुरुवार शाम भारतीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर पुनर्निर्माण के लिए भारत से सहयोग मांगा। हालांकि, उन्होंने किसी निश्चित राशि की मांग नहीं की। बैठक में मौजूद एक नेपाली अधिकारी के मुताबिक, वाग्ले ने कहा कि नेपाल को बाढ़ से प्रभावित क्षेत्रों के पुनर्निर्माण के लिए भारत से महत्वपूर्ण सहायता की उम्मीद है। इस पर निर्मला सीतारमण ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारत पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट यानी आपदा के बाद जरूरतों के आकलन की रिपोर्ट आने के बाद नेपाल की आवश्यकताओं का मूल्यांकन करेगा और उसके आधार पर सहायता की सीमा तय की जाएगी।
सीतारमण ने कहा कि नेपाल की जरूरतों का आकलन पूरा होने के बाद भारत इस संबंध में फैसला करेगा। बोटेकोशी नदी के किनारे बसे इलाकों में बाढ़ से बड़े पैमाने पर संपत्ति और बुनियादी ढांचे को नुकसान पहुंचा है। नेपाल सरकार ने नुकसान का आकलन करने के लिए पोस्ट-डिजास्टर नीड्स असेसमेंट शुरू कराया है, जिसकी अंतिम रिपोर्ट करीब चार सप्ताह में आने की उम्मीद है।
2015 के भूकंप के बाद भारत ने की थी बड़ी मदद
बैठक में दोनों देशों के बीच करीब 10 साल पहले भारत की ओर से नेपाल को दी गई लाइन ऑफ क्रेडिट को अंतिम रूप देने और उसके इस्तेमाल पर भी चर्चा हुई। वर्ष 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद भारत ने पुनर्निर्माण और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा खड़ा करने के लिए करीब 100 अरब रुपये की सहायता का ऐलान किया था। इसमें 25 अरब रुपये अनुदान और 75 अरब रुपये सॉफ्ट लोन के रूप में दिए जाने थे। हालांकि, विभिन्न शर्तों के चलते नेपाल इस कर्ज का पूरी तरह इस्तेमाल नहीं कर सका। नेपाल अब इस राशि को ऊर्जा क्षेत्र में इस्तेमाल करने की संभावना पर भी विचार कर रहा है।
बाढ़ के बाद बदली नेपाल की प्राथमिकता
नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खानाल ने हाल ही में भारत यात्रा के दौरान बुनियादी ढांचे, खासकर सड़क और ऊर्जा क्षेत्र के लिए 500 मिलियन डॉलर की अनुदान सहायता और 500 मिलियन डॉलर के रियायती ऋण का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, बोटेकोशी बाढ़ के बाद नेपाल की प्राथमिकताएं बदल गई हैं और इस प्रस्ताव की दोबारा समीक्षा की जा रही है। नेपाल के विदेश मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि बाढ़ के बाद परिस्थितियां बदल गई हैं और अब प्राथमिकता पुनर्निर्माण और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे को दोबारा तैयार करने की है।
भारत ने राहत और बचाव में दिया सहयोग
भारत के वित्त मंत्रालय के अनुसार, निर्मला सीतारमण ने बाढ़ में जान गंवाने वाले लोगों के प्रति संवेदना जताई और नेपाल के राहत एवं पुनर्निर्माण प्रयासों में भारत के निरंतर सहयोग का भरोसा दिया। वहीं, वाग्ले ने राहत सामग्री और बचाव अभियान के दौरान भारत की ओर से दिए गए तकनीकी सहयोग के लिए धन्यवाद दिया। दोनों पक्षों ने व्यापार, निवेश, ऊर्जा और कनेक्टिविटी समेत विभिन्न क्षेत्रों में द्विपक्षीय आर्थिक संबंधों को मजबूत करने पर भी चर्चा की। दोनों देशों ने व्यापार और आर्थिक साझेदारी को और आगे बढ़ाने की जरूरत पर जोर दिया।
बाढ़ प्रभावित जिलों में बनेगा पुनर्निर्माण का प्लान
नेपाल सरकार ने बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित रसुवा और नुवाकोट जिलों में पुनर्निर्माण और पुनर्वास की जरूरतों का आकलन करने के लिए एक समिति का गठन किया है। आकलन पूरा होने के बाद नेपाल या तो दाता सम्मेलन आयोजित करेगा या फिर मित्र देशों, अंतरराष्ट्रीय दाता संगठनों और चैरिटेबल संस्थाओं से अलग-अलग सहायता मांगेगा। नेपाल बोटेकोशी नदी के किनारे भविष्य में जलवायु संबंधी आपदाओं से निपटने के लिए मजबूत और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करने पर भी जोर दे रहा है।
