यूनिपोल्स पर लगे अवैध फ्लैक्स का मामला

Front hulchul news : शहर के 100 से अधिक यूनिपोल्स पर लगे अवैध राजनीतिक और धार्मिक फ्लैक्स का मामला अब पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट तक पहुंच गया है। शहर के तमाम विज्ञापनों का ठेका लेने वाली कंपनी क्रिएटिव ओ.ओ.एच. की याचिका पर 16 अक्तूबर को सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने कंपनी को 17 अक्तूबर को जालंधर निगम से संपर्क कर संबंधित यूनिपोल्स से अवैध और अनधिकृत होर्डिंग्स हटवाने की मांग करने की छूट दी है। अदालत में पंजाब सरकार की ओर से यह भी कहा गया कि जरूरत पड़ने पर पुलिस नगर निगम को आवश्यक सहायता उपलब्ध करवाएगी।

जस्टिस पंकज जैन की अदालत ने स्पष्ट किया कि जहां पुलिस सहायता की जरूरत हो, वहां संबंधित नगर निगम कमिश्नर पुलिस अधिकारियों से इसकी मांग करेंगे। इसके बाद संबंधित पुलिस अधिकारी कानून के अनुसार होर्डिंग्स हटाने के लिए आवश्यक सहायता सुनिश्चित करेंगे। अदालत ने इसी आधार पर याचिका का निपटारा कर दिया।

हाईकोर्ट के आदेश के बाद क्रिएटिव ओओएच ने 17 अक्तूबर को जालंधर नगर निगम कमिश्नर को पत्र लिखकर आदेश पर तुरंत कार्रवाई करने की मांग की। कंपनी ने कहा कि उसके आबंटित विज्ञापन स्थलों पर अवैध राजनीतिक और धार्मिक फ्लेक्स लगे होने के कारण उसके ग्राहकों के विज्ञापन ढक रहे हैं और कई जगह उन्हें नुकसान भी पहुंचा है। कंपनी ने दावा किया कि इससे उसे आर्थिक नुकसान हो रहा है और विज्ञापन लगाने का काम प्रभावित हो रहा है।

कंपनी ने निगम से मांग की है कि अवैध फ्लेक्स हटाने के लिए पुलिस सहायता ली जाए, संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की जाए और विज्ञापन स्थलों को दोबारा इस्तेमाल के योग्य बनाया जाए। कंपनी ने कार्रवाई के दौरान सुरक्षा उपलब्ध करवाने और हटाए गए फ्लेक्स का रिकॉर्ड रखने की मांग भी की है।

15 करोड़ से अधिक निवेश का दिया हवाला

क्रिएटिव ओ.ओ.एच. ने अपने पत्र में कहा है कि उसने विज्ञापन ढांचे पर 15 करोड़ रुपए से अधिक का निवेश किया है। कंपनी के अनुसार अवैध फ्लैक्स के कारण उसके आवंटित विज्ञापन स्थलों का इस्तेमाल प्रभावित हो रहा है। गौरतलब है कि कंपनी ने शहर के विज्ञापन ठेके के लिए करीब 13.71 करोड़ रुपए की बोली दी थी। इस मामले में पहले भी कंपनी की ओर से निगम को चेतावनी दी गई थी कि यदि यूनिपोल्स पर उसके ग्राहकों के विज्ञापन लगाने के लिए जगह उपलब्ध नहीं करवाई गई तो तय मासिक भुगतान करना मुश्किल हो सकता है। कंपनी ने इस संबंध में हाईकोर्ट का रुख करने की बात कही थी और अब अदालत से आदेश मिलने के बाद उसने निगम से कार्रवाई की मांग की है।

अब निगम और पुलिस की कार्रवाई पर नजर

हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब नगर निगम प्रशासन और पुलिस की भूमिका अहम हो गई है। कंपनी ने निगम कमिश्नर से अवैध फ्लेक्स हटाने के लिए कार्रवाई शुरू करने और पुलिस सहायता लेने की मांग की है। अब देखना होगा कि निगम इस मामले में कब और किस स्तर पर कार्रवाई करता है। यदि विज्ञापन स्थलों को इस्तेमाल के योग्य नहीं बनाया गया तो कंपनी और निगम के बीच मासिक भुगतान तथा अन्य आर्थिक दावों को लेकर विवाद आगे भी बढ़ सकता है। मामला अदालत की अवमानना संबंधी याचिका तक भी जा सकता है।